रविवार, 20 फ़रवरी 2011

hey eshwar (tanu thadani)

सारा जीवन इक कागज है,
हम दुःख-सुख लिखते जाते हैं !
हम हैं  बच्चो के जैसे  जो,
कागज की नाव बनाते हैं !!

कुछ छूट गया ,कुछ पकड़ लिया,
सारा जीवन यूँ व्यर्थ गया !
जब शाम हुई ,तम देख-देख .
हम रोने क्यूँ लग जाते हैं!!

हर शाम का स्वागत किया करो,
ये शाम सुबह को लाती है!
इक-इक छण-छण में जीवन है ,
जो बच्चो में मुस्काती है !!

जब दुःख आये ,सुख बाँट दो सब ,
तुमको भी सुख मिल जायेगा !
तेरे जैसा ही इक कोई ,
तुमको भी खुश कर जायेगा !!

जीवन को मानो मस्त हवा ,
मत बांधो रिश्ते -नातों में !
हर इक से रिश्ता रखो मगर ,
मत उलझो शह औं मातों में !!

हमने तुमने क्यूँ सुना नहीं ,
जो कान में ईश्वर ने कहा ,
अपने अंदर में ख़ुशी रखो ,
और मुख से निकले हा!हा!!हा !!!   



  

hey eshwar

हे ईश्वर तेरी दुनिया मैं ,
हर रिश्ते -नाते बिकते हैं !

हर घर पे है छत नफरत की ,
हर घर में दरवाजे छल के ,
घर के बाहर क्या अंदर भी ,
षडयंत्रो की हाला छलके !

हे ईश्वर सच तो यही ही की ,
जो बिकते हैं वो टिकते हैं !!

जो बिका नहीं वो व्यर्थ गया ,
हम सब दुःख-सुख में हैं नपते !
हम सब सदियो से छुरे लिये,
बस नाम ही तेरा हैं  जपते !!

सब शक के पेड पे बैठ-बैठ ,
रिश्तो के फल को खाते हैं !
अपनी-अपनी ढपली ले कर ,
अपना ही राग सुनाते हैं!!


सूरज से ताप का रिश्ता हैं,
चंदा से ठंडक  का रिश्ता !
सदियो से अटूट इन रिश्तो सा ,
हम में भी भर दो इक रिश्ता !!

हे ईश्वर धैर्य भरो हममें ,
हर पोर-पोर से दुख रिसता!
हर ओर ही घोर अँधेरा हैं ,
खुद के ही हाथ न दिखते हैं!!